૧૬૬, मन मोहन माधव
Date. 9.3.26
ઢાળ:-બ્રહ્મ લીન નારાયણ બાપુએ ગાયેલું ભજન "જબ ચાહ હમારે દીલમેં હે..."જેવો
मन मोहन माधव बनवारी, बंसी बजावत हे प्यारी
जलचर स्थलचर नभचर मोहा, गोप गोपियां खोई शुद्ध सारी.....
ब्रिंदाबन में बांके बिहारी, मोर मुकुट को शिर धरा
गल बैजन्ती माला शोभत हे, नायनोमें स्नेह भंडार भरा
अधर कमल पर मुरली मनोहर, सुर बहे मंगलकारी.....
कमल नयन कान्हा आनंद सागर, पितांबर अंग अति भावन है
सांवरी सूरत पर तिलक सजायो, मंद मंद मुस्कुरावात है
बाजूबंध कमर कंदोरा, कान कुंडल शोभा भारी.....
अकासुर बकासुर मारा, पुतनाका भी संहार किया
मथुरा नगरको मोह लगायो, कुबजाका रूप शृंगार किया
मामा कंस को मुष्टिका मारी, माता पिता के कष्ट हारी.......
"केदार" कन्हैया दास तुम्हारो, भजन गाते बीते जन्मारो,
माया जगतकी मनमे रहे ना, मिट जाए सब जंजारो
अंत समय हरि नाम रहे मुख, नयनों निरखे कान्हा छब तारी......
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